भाषा के कारागार से आजाद (नामवर सिंह की आलोचना)

Authors

  • Akhil Mishra Assistant Professor, Department of Hindi, Deendayal Upadhyay University, Gorakshpur, Uttar Pradesh

Keywords:

आलोचना, मार्क्सवादी-चिंतन, कलावादी आलोचना, दूसरी परंपरा, औपनिवेशिक विचारधारा

Abstract

नामवर सिंह ने बहस, वाद-विवाद-संवाद जैसी सभी शैलियों को आलोचना के क्षेत्र में न केवल स्थापित किया बल्कि आलोचना क्षेत्र का स्वरूप भी वृहत्तर किया। उनकी आलोचना में स्पष्टवादिता, तीक्ष्णता, महत्त्वपूर्ण स्थापनाएँ, विश्व साहित्य की झलकियाँ, भारतीय चिंतन दिखाई देता है। उनके अपने पूर्व के आलोचकों के अनेक गुण-धर्म समाहित हैं। हम यदि नामवर सिंह की आलोचकीय-भाषा पर विचार करते हुए नामवर सिंह के ही उद्धरण को खोजे तो वह एक आलेख में मिल जायेगा जो कभी उनकी पुस्तक ‘वाद-विवाद-संवाद‘ के ‘आलोचना की भाषा‘ नामक अध्याय में उल्लेखित है। इस लेख के माध्यम से नामवर सिंह ने ’घोर विचार शैथिल्य और बुद्धि का आलस्य फैलने का खतरा’ की ओर इशारा किया है।

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Published

2026-10-01

How to Cite

भाषा के कारागार से आजाद (नामवर सिंह की आलोचना). (2026). Vagdhara, 1(2), 41-45. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/16

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