भाषा के कारागार से आजाद (नामवर सिंह की आलोचना)
Keywords:
आलोचना, मार्क्सवादी-चिंतन, कलावादी आलोचना, दूसरी परंपरा, औपनिवेशिक विचारधाराAbstract
नामवर सिंह ने बहस, वाद-विवाद-संवाद जैसी सभी शैलियों को आलोचना के क्षेत्र में न केवल स्थापित किया बल्कि आलोचना क्षेत्र का स्वरूप भी वृहत्तर किया। उनकी आलोचना में स्पष्टवादिता, तीक्ष्णता, महत्त्वपूर्ण स्थापनाएँ, विश्व साहित्य की झलकियाँ, भारतीय चिंतन दिखाई देता है। उनके अपने पूर्व के आलोचकों के अनेक गुण-धर्म समाहित हैं। हम यदि नामवर सिंह की आलोचकीय-भाषा पर विचार करते हुए नामवर सिंह के ही उद्धरण को खोजे तो वह एक आलेख में मिल जायेगा जो कभी उनकी पुस्तक ‘वाद-विवाद-संवाद‘ के ‘आलोचना की भाषा‘ नामक अध्याय में उल्लेखित है। इस लेख के माध्यम से नामवर सिंह ने ’घोर विचार शैथिल्य और बुद्धि का आलस्य फैलने का खतरा’ की ओर इशारा किया है।
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Published
2026-10-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
भाषा के कारागार से आजाद (नामवर सिंह की आलोचना). (2026). Vagdhara, 1(2), 41-45. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/16