दलितों का संघर्ष और जयप्रकाश कर्दम की कविताएं

Authors

  • Bijendra Kumar Asansol Girls College Author

Keywords:

दलित साहित्य, स्वानुभूति और सहानुभूति, लोकतंत्र, शोषण,

Abstract

भारतीय समाज में दलितों की पीड़ा को पहचानने और उसे व्यक्त करने में मुख्यधरा के साहित्य का नजरिया गौणतमूलक रहा है दलितों की पीड़ा को खुद दलितों ने जब व्यक्त किया तो वह दलित साहित्य कहलाया। हिंदी दलित कविता में जयप्रकाश कर्दम एक पुराना और संघर्षशील नाम है। नौवे दशक में कर्दम साहब ‘छप्पर’ उपन्यास के माध्यम से दलित साहित्य में अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज करवाते हैं तथा तब से लेकर अब तक उनका निरंतर दलित लेखन जारी है। क्या लोकतंत्र में दलितों की जीवन स्थिति और संघर्ष अथवा उसकी पहचान में को बदलाव आया है या नहीं? क्या लोकतंत्र दलितों के अधिकार दिलाने में सक्षम है या नहीं? इन्ही सवालों कि तफ्तीश इस लेख में जयप्रकाश कर्दम की कविताओं के माध्यम से कि गयी है।

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Published

2026-01-30

How to Cite

दलितों का संघर्ष और जयप्रकाश कर्दम की कविताएं. (2026). Vagdhara, 1(1), 22-28. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/5