स्वातंत्र्योत्तर हिंदी आलोचना और रामविलास शर्मा

Authors

  • Mahendra Kushwaha Assistant Professor, Department of Hindi, BHU, Varansi

Keywords:

मार्क्सवादी आलोचना, कविता के प्रतिमान, हिंदी नवजागरण, जातीय साहित्यिक परम्परा

Abstract

स्वतंत्रता के बाद हिंदी के सृजनात्मक साहित्य में चतुर्मुखी परिवर्तन हुआ। साहित्य की प्रायः सभी विधाओं- कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध आदि में भाषा, शिल्प, कथ्य, प्रस्तुति आदि कई स्तरों में परिवर्तन लक्षित किये गए। इस तरह के परिवर्तन से साहित्य में जो बदलाव आया उसके मूल्यांकन के लिए आलोचना के नए मान-मूल्यों और प्रतिमान की आवश्यकता हुई। परिणामतः इस युग में आकार आलोचना का कई स्तरों में विकास हुआ, खासकर १९३६ ई॰ से चली आती हुई मार्क्सवादी आलोचना का। समाजवादी विचारधारा को केंद्र में रखकर चलने वाली इस आलोचना धारा का सर्वोत्कृष्ट रूप हमें इसी युग में मिलता है। रामविलास शर्मा, नामवर सिंह, मुकबोध, मैनेजर पाण्डेय जैसे प्रखर मार्क्सवादी आलोचक इसी आलोचना की देन हैं।

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Published

2026-10-01

How to Cite

स्वातंत्र्योत्तर हिंदी आलोचना और रामविलास शर्मा. (2026). Vagdhara, 1(2), 12-17. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/12

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