शालिग्राम की कथा- यात्रा
Keywords:
निम्नवर्ग, मध्यमवर्ग, अंचल की पीड़ा, भेदभाव, प्रगतिशील विचारधाराAbstract
हिन्दी साहित्य के आंचलिक कथाकार शालिग्राम साठोत्तरी भारत के लोक जीवन की अनुभूतियों को उत्कृष्टता के साथ अभिव्यक्त करने वाले उपन्यासकार, कवि, रिपोतार्जकार हैं। कोसी पुत्र शालिग्राम निरंतर साहित्य साधना में लीन रहने लगे।अपनी रचनाओं में अंचल की संवेदनशील भावों को समेटते तथा अंतर्मन के तथ्यों को कहानी के रूप संवेदित करने लगे। इनकी प्रथम कहानी “ बासमती” 1962 ई. में प्रकाशन में गई। इससे पहले ये “ इंसान की लाश” का संपादन 1953 ई. में किये। बासमती कहानी अपने कथ्य और विषय वस्तु के लिहाज से बेहद चर्चित रहा। शालिग्राम की तमाम कहानियों में कोसी अंचल की पीड़ा, कोसी की कछार पर बसे पात्रों की जीवन के रंग कोसी का तांडव कहें या कोसी धारा की सर्पीली चाल कहें जो नदी के कटाव की यातना झेलते पर बेपरवाह जिंदगी बिताते। जल (बाढ़) रूपी चादर उतारते है और भू- फोड़ फसलों की होड़ में लीन हो जाते हैं। इनके तमाम पात्र गाँव- गँवई भाषा बोलते निम्नवर्गीय या मध्यमवर्गीय है जो सदैव अपने मुकाम प्राप्त करने के लिए प्रयत्न शील रहते हैं।