प्रेमचंद और रवींद्रनाथ ठाकुर के बाल कहानियों का तुलनात्मक विश्लेषण

Authors

  • Madan Sah Vidyasagar Univeristy

Keywords:

बाल साहित्य, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक विकास, अकेलापन, मानवीय संवेदना

Abstract

बाल-साहित्य बच्चों से संबंध रखने वाला साहित्य है। बाल-साहित्य के माध्यम से बच्चों के मन को समझा जा सकता है। बच्चों में पढ़ने, विचार  तथा समझने की प्रवृत्ति का विकास बाल साहित्य करता है। प्रेमचंद और रवींद्रनाथ ठाकुर दोनों ही अपनी अपनी भाषाओं के साहित्य में श्रेष्ठतम साहित्यकार रहे हैं। दोनों साहित्यकारों ने समाज के विभिन्न समस्याओं का चित्रण अपने अपने साहित्य में किया है। दोनों ही साहित्यकारों ने अपने-अपने साहित्य के माध्यम से बाल साहित्य को समृद्ध किया हैं। ‘ईदगाह’ कहानी का प्रमुख पात्र हामिद सभी विषम परिस्थितियों से विजय प्राप्त करता है। उसके पास उसकी दादी का साथ है। बड़ों के द्वारा दिया गया उत्साह तथा प्रेम बाहरी परिस्थितियों से लड़ने में बच्चों की मदद करता है। ‘गुल्ली- डंडा’ जैसी कहानियां बच्चों में किसी तरह के भेदभाव को मिटाने का प्रयास करती है। रवींद्रनाथ ठाकुर की कहानी ‘छुट्टी’ अत्यंत भाभुक कर देने वाली कहानी है। अभिभावक का अपने बच्चों के प्रति कैसा व्यवहार होना चाहिए यह कहानी हमें बताता है। बाल मन पर अभिभावकों के मारपीट , डांट डपट का क्या  कुप्रभाव पड़ सकता है इसका यथार्थ प्रमाण छुट्टी कहानी में है। ‘काबुलीवाला’ कहानी में रहमत और मिनी के मित्रता तथा एक पिता की संवेदना को देखा जा सकता है।

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Published

2026-01-30

How to Cite

प्रेमचंद और रवींद्रनाथ ठाकुर के बाल कहानियों का तुलनात्मक विश्लेषण. (2026). Vagdhara, 1(1), 35-40. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/7