रामस्वरूप चतुर्वेदी की दृष्टि में कबीर और तुलसी

Authors

  • Aruna Kumari Fromer Research Scholar, Banaras Hindu University

Keywords:

रसास्वादन, धर्म निरपेक्ष, अद्वैत दर्शन, सूफ़ी परंपरा, भारतीय प्रतीक-विधान

Abstract

रामस्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार ‘रचना जीवन के अर्थ का विस्तार करती है और आलोचना रचना के अर्थ का।’ इस तरह से देखें तो जिस तरह से रचना में ‘झूठ सच’ की कोई गुंजाइश नहीं रहती, उसी प्रकार आलोचना में भी ‘झूठ सच’ की कोई जगह नहीं होती। रचनाकार जीवन के यथार्थ को अभिव्यक्ति प्रदान करता है और आलोचक रचना के यथार्थ को। जिस प्रकार ‘झूठ सच’ की आसक्ति से मुक्त होकर ही ‘महाकवि’ बना जा सकता है, उसी प्रकार ‘आलोचक’ के लिए रचना से इत्तर के प्रतिमानों से मुक्त होकर रचना के भीतर के सच को उद्घाटित करने का दायित्व होता है।

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Published

2026-10-01

How to Cite

रामस्वरूप चतुर्वेदी की दृष्टि में कबीर और तुलसी. (2026). Vagdhara, 1(2), 6-11. https://vagdhara.in/index.php/vagdhara/article/view/17

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