मेघों के देश में
Keywords:
जनजातीय जीवन शैली, यात्रा-वृत्तान्त, प्राकृतिक सुंदरता , जीविका, भौगोलिक क्षेत्रAbstract
मेघों के देश में’ (मेघालय की यात्रा-कथा) डॉ. साँवरमल सांगानेरिया द्वारा लिखित एक उत्कृष्ट यात्रा-वृत्तान्त है। यह पुस्तक मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और जनजातीय जीवन शैली का सजीव और प्रामाणिक चित्रण प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने हमारी उन तमाम धारणाओं-पूर्वाग्रहों को दूर करने का प्रयास किया है जो वर्षो से हम जनश्रुति के आधार पर ग्रहण किये थे। यह यात्रा-वृत्तांत आधुनिक युग की व्यस्त जीवन शैली को ध्यान में रख कर लिखी गयी है। जो व्यक्ति अपनी सारी चिंताओं, तनाव को प्रकृति की गोद में जाकर वह कुछ समय तक वह सारी समस्याओं को दर किनार कर उससे गुफ्तगूं कर सके। लेखक जब दृश्यों का वर्णन करते हैं तो वह ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे हम भी उनके साथ-साथ यात्रा कर रहे हैं। सभी का इतनी सजीवता से व्याख्या करते है कि कोई भी व्यक्ति मानसिक यात्रा के आधार पर इन मनोरम दृश्यों को हृदयंगम करते हुए बादलों के घेरे में खो जाने को स्वत: तैयार हो जायेगा। यह तीन खंडों में लिखा गया है। इसके पहले खण्ड का शीर्षक ख़ासी पहाड़ खण्ड है, जिसमें छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से लेखक यहाँ की बात करता है यह कुल 29 हैं। इसके द्वितीय खण्ड का शीर्षक जयंतियाँ पहाड़ खण्ड है, जिसमें कुल 9 पाठ हैं व इसके तीसरे खण्ड का नाम गारो पहाड़ खण्ड है जिसमें कुल 8 पाठ हैं।