विश्वभारती हिंदी भवन पुस्तकालय: स्थापना, विकास का अवलोकन
Abstract
विश्वभारती, शांतिनिकेतन के हिंदी भवन पुस्तकालय की स्थापना १९३९ में रवींद्रनाथ टैगोर की बहु-सांस्कृतिक शिक्षा-दृष्टि और पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी के प्रयासों से हुई। यह पुस्तकालय हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के अध्ययन-अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य पुस्तकालय के ऐतिहासिक विकास, संग्रह, सेवाओं और वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करना है। प्रारंभिक सीमित संग्रह से विकसित होकर पुस्तकालय में वर्तमान में ३७,५३२ पुस्तकें, दुर्लभ ग्रंथ, हस्ताक्षरित कृतियां और पत्रिकाएं उपलब्ध हैं। २०१६-१७ से २०२५-२६ तक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि आवंटित धनराशि और पुस्तक खरीद में सीधा संबंध है। वर्ष २०१९-२० में अधिकतम २,१४,००० रूपये के फंड से ५७६ पुस्तकें खरीदी गईं, जबकि २०२५-२६ में फंड घटकर १९,००० रूपये और खरीद ४३ रह गई। उपहार से प्राप्त पुस्तकों में भी २०१६-१७ के १२२ से गिरावट आकर २०२५-२६ में २३ रह गई। पुस्तकालय ने OPAC, डिजिटल लाइब्रेरी, इंटरनेट और रिप्रोग्राफी जैसी आधुनिक सेवाएं अपनाई हैं। अध्ययन दर्शाता है कि पुस्तकालय के सतत विकास हेतु नियमित बजट, दान और तकनीकी उन्नयन आवश्यक हैं, ताकि यह हिंदी अनुसंधान में अपना योगदान बनाए रख सके।